Indian Railways News => Topic started by AllIsWell on Oct 03, 2012 - 15:00:05 PM


Title - बिजली से चलने वाली ट्रेन एक बार फिर अटक गई
Posted by : AllIsWell on Oct 03, 2012 - 15:00:05 PM

वाराणसी : बिजली से चलने वाली ट्रेन एक बार फिर अटक गई। मुगलसराय से वाराणसी होते हुए लखनऊ तक महात्मा गांधी की जयंती पर मंगलवार को मालगाड़ी चलाकर परीक्षण किया जाना था। अपना यह वादा रेल विद्युतीकरण विभाग पूरा नहीं कर सका।
जानकारों का कहना है कि अब तक रेलवे को बिजली सप्लाई करने के लिए बनाए गए दो उपकेंद्र चालू नहीं किए जा सके हैं। इस कारण विद्युत ट्रेन संचालन की सारी तैयारी धरी की धरी रह गई। रेलवे बोर्ड ने 2007 में मुगलसराय से वारास्ता वाराणसी, जफराबाद, जौनपुर सिटी, सुल्तानपुर, हैदरगढ़ होकर लखनऊ तक 297 किलोमीटर का विद्युतीकरण के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की योजना बनाई थी। इसका काम इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एस्कान)को सौंपा गया। लगभग पांच वर्षो में एस्कान ने तारों का संजाल फैला दिया।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि वाराणसी से लखनऊ के बीच पांच पॉवर सबस्टेशन बनाये जाने थे लेकिन अब तक तीन बनकर तैयार हैं दो उपकेंद्र बन रहे हैं। इनके ऊर्जीकृत होने में दो महीना और लगेगा। इधर, स्थानीय पॉवर केबिन को इलेक्ट्रिक लाइन से जोड़ दिया गया है। चालक व सहायक चालकों को विद्युत इंजन संचालन का प्रशिक्षण गाजियाबाद स्थित इलेक्ट्रिक शेड में दिया जा चुका है।
एक करोड़ रुपये का नुकसान :
अब तक बिजली वाली ट्रेनें नहीं चलाए जाने से रेलवे को आर्थिक नुकसान हो रहा है। रेलवे के डीजल रेस्टोरेशन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार बिजली से गाड़ियों को चलाए जाने पर कैंट स्टेशन को प्रतिमाह एक करोड़ रुपये की बचत होगी।
इन ट्रेनों को मिलेगी गति : कैंट स्टेशन से गुजरने वाली गुवाहाटी राजधानी, हिमगिरि एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, वरुणा एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस, मरुधर एक्सप्रेस, अमृतसर एक्सप्रेस सहित दो दर्जन से अधिक ट्रेनों की गति में इजाफा हो जाएगा।
तकनीकी खामी : लखनऊ मंडल के डीआरएम जगदीश राय का कहना है कि मंगलवार को परीक्षण किया जाना था। कुछ तकनीकी खामी के कारण टेस्टिंग का कार्य रोकना पड़ा है। परीक्षण की नई तिथि शीघ्र घोषित की जाएगी।वाराणसी : बिजली से चलने वाली ट्रेन एक बार फिर अटक गई। मुगलसराय से वाराणसी होते हुए लखनऊ तक महात्मा गांधी की जयंती पर मंगलवार को मालगाड़ी चलाकर परीक्षण किया जाना था। अपना यह वादा रेल विद्युतीकरण विभाग पूरा नहीं कर सका।
जानकारों का कहना है कि अब तक रेलवे को बिजली सप्लाई करने के लिए बनाए गए दो उपकेंद्र चालू नहीं किए जा सके हैं। इस कारण विद्युत ट्रेन संचालन की सारी तैयारी धरी की धरी रह गई। रेलवे बोर्ड ने 2007 में मुगलसराय से वारास्ता वाराणसी, जफराबाद, जौनपुर सिटी, सुल्तानपुर, हैदरगढ़ होकर लखनऊ तक 297 किलोमीटर का विद्युतीकरण के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की योजना बनाई थी। इसका काम इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एस्कान)को सौंपा गया। लगभग पांच वर्षो में एस्कान ने तारों का संजाल फैला दिया।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि वाराणसी से लखनऊ के बीच पांच पॉवर सबस्टेशन बनाये जाने थे लेकिन अब तक तीन बनकर तैयार हैं दो उपकेंद्र बन रहे हैं। इनके ऊर्जीकृत होने में दो महीना और लगेगा। इधर, स्थानीय पॉवर केबिन को इलेक्ट्रिक लाइन से जोड़ दिया गया है। चालक व सहायक चालकों को विद्युत इंजन संचालन का प्रशिक्षण गाजियाबाद स्थित इलेक्ट्रिक शेड में दिया जा चुका है।
एक करोड़ रुपये का नुकसान :
अब तक बिजली वाली ट्रेनें नहीं चलाए जाने से रेलवे को आर्थिक नुकसान हो रहा है। रेलवे के डीजल रेस्टोरेशन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार बिजली से गाड़ियों को चलाए जाने पर कैंट स्टेशन को प्रतिमाह एक करोड़ रुपये की बचत होगी।
इन ट्रेनों को मिलेगी गति : कैंट स्टेशन से गुजरने वाली गुवाहाटी राजधानी, हिमगिरि एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, वरुणा एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस, मरुधर एक्सप्रेस, अमृतसर एक्सप्रेस सहित दो दर्जन से अधिक ट्रेनों की गति में इजाफा हो जाएगा।
तकनीकी खामी : लखनऊ मंडल के डीआरएम जगदीश राय का कहना है कि मंगलवार को परीक्षण किया जाना था। कुछ तकनीकी खामी के कारण टेस्टिंग का कार्य रोकना पड़ा है। परीक्षण की नई तिथि शीघ्र घोषित की जाएगी।