Indian Railways News => Topic started by irmafia on Jan 09, 2013 - 18:01:12 PM


Title - चित्रसेन का सपना आखिरकार हुआ सच
Posted by : irmafia on Jan 09, 2013 - 18:01:12 PM

स्व. चित्रसेन सैनी का सपना आखिरकार सच हो ही गया। उन्होंने लंबे समय तक रेवाड़ी-झज्जर रेललाइन के लिए संघर्ष किया। उनके आमरण अनशन पर बैठने का प्रतिफल ही था कि रेलवे लाइनों का सर्वेक्षण रेल विभाग ने करवाया। आज दोपहर रेल झज्जर स्टेशन पर आकर रुकी तो उनका संघर्ष सार्थक हो गया।रेलवे लाइन से जुड़ने का सपना झज्जर जन कल्याण समिति के संस्थापक प्रधान चित्रसेन सैनी ने दिखाया और उसके लिए रोहतक जिले के सैकड़ों गांवों को साइकिल एवं पैदल यात्रा कर नापा था। सिर्फ यही नहीं, धरने, प्रदर्शन, क्रमिक भूख हड़ताल व आमरण अनशन तक किए। 625 करोड़ रुपये की लागत से बनी रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक रेल लाईन का मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री केजे सूर्यप्रकाश रेड्डी ने आज जब शुभारंभ किया तौ सैनी का सपना हकीकत में साकार हो गया। इस 75 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन बनने से रोहतक व रेवाड़ी के बीच का रास्ता कम होकर 81 किलोमीटर रह जाएगा। इसके लिए नहरों, ड्रेनों व नालों पर 124 रेल पुलों का निर्माण किया गया है। 36 लेवल क्रासिंग, 32 सीमित ऊंचाई के रास्ते और 4 सड़कों के ऊपर से रेल पुल बनाए गए हैं। रेललाइन का 24 किलोमीटर भाग रेवाड़ी में, 48 किलोमीटर झज्जर में तथा रोहतक जिला के अस्थल बोहर तक का 3 किलोमीटर भाग शामिल है।झज्जर में रेलवे लाइन की माग करने वाले एकमात्र शख्स थे चित्रसेन सैनी। उन्होंने राजकीय पोलिटेक्निक में कर्मशाला शिक्षक के पद पर नौकरी ग्रहण करने के बाद झज्जर को ही अपना घर मान लिया था। चित्रसेन सैनी ने झज्जर को रेल लाइन से जोड़ने की माग को लेकर ही रोहतक लोकसभा का चुनाव तक लड़े। राजनीतिक दलों के नेताओं एवं केंद्र सरकार के आश्वासनों के बावजूद जब रेलवे लाइन के आने की कोई आस नहीं दिखाई दी तो उन्होंने वर्ष 1985 में पहले क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की लेकिन बात न बनते देख उन्होंने क्रमिक भूख हड़ताल को आमरण अनशन में तब्दील करने में जरा भी देरी नहीं लगाई। चित्रसेन सैनी को पुलिस अनशन स्थल से उठा कर ले गई, उसी समय अनशन स्थल पर उनकी धर्मपत्‍‌नी धर्मकौर ने आमरन अनशन पर बैठने की घोषणा कर झज्जर में मोर्चा संभाल लिया। उसके बाद से ही रेल लाईनों के सर्वे के निर्देश भारत सरकार की तरफ से जारी हुए। वर्ष 1993 में 5 मार्च को झज्जर को रेल लाईन से जुड़ने का स्वपन् देखने वाले चित्रसेन सैनी का दिल का दौरा पड़ने के कारण असामयिक निधन होने के कारण वे अपने जीते जी जिले को रेल लाईन से जुड़ते हुए नहीं देख पाए। सैनी सभा के प्रधान रामफल सैनी ने आज मांग की कि चित्रसेन सैनी की एक प्रतिमा झज्जर रेलवे स्टेशन पर स्थापित की जाए। इस आशय का मांग पत्र उन्होंने सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी सौंपा। सभा की मांग सिरे चढ़ेगी या नहीं लेकिन रेल आई तो स्व. चित्रसेन सैनी का सपना पूरा हो गया।