Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Sep 25, 2012 - 15:01:02 PM


Title - ऑक्सीजन आती, उससे पहले ही आ धमकी मौत!
Posted by : RailXpert on Sep 25, 2012 - 15:01:02 PM

जयपुर.रेलवे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज की रविवार देर रात हालत बिगड़ गई। ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। डॉक्टर भी मौजूद नहीं थे। परिजनों के शोर मचाने पर नर्सिग स्टाफ ने फोन कर डॉक्टर को बुलाया। सिलेंडर की व्यवस्था की। लेकिन यह राहत ज्यादा देर कायम नहीं रही। सुबह फिर आईसीयू स्टाफ की डच्यूटी बदली, लेकिन मरीज की स्थिति फिर रात जैसी हो गई। ऑक्सीजन फिर खत्म। लेकिन मरीज रात की तरह खुशकिस्मत नहीं रहा। इस बार ऑक्सीजन आने से पहले मौत आ गई।

सोमवार सुबह 11:30 बजे मरीज के परिजन ने भास्कर को फोन पर बताया कि वे अस्पताल स्टॉफ को ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए कई बार कह चुके हैं। स्टाफ कहता है, खुद व्यवस्था कर लो।

15 मिनट बाद फिर फोन आया, ‘ऑक्सीजन खत्म होने वाली है हमारे साथी सिलेंडर की व्यवस्था में गए हैं। भास्कर संवाददाता के अस्पताल पहुंचते-पहुंचते (20 मिनट में) फिर फोन आया..बुझी आवाज में..‘मरीज की मौत हो गई।’

घटनाक्रम से सुलगते सवाल

-आईसीयू में रात को भर्ती मरीजों को देखने के लिए कोई डॉक्टर मौजूद क्यों नहीं रहते

-ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी बुनियादी जरूरत का पहले से पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं

-जब पता था कि मरीज की ऑक्सीजन खपत बढ़ गई (डॉक्टरों मुताबिक) है तो भी सुबह 12 बजे तक ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई।

-आईसीयू के हालात जनरल वार्ड जैसे क्यों

फिर तो कई सिलेंडर आ पहुंचे

भास्कर टीम के अस्पताल पहुंचते ही आनन-फानन में कई सिलेंडर अस्पताल पहुंच गए। अब एक डॉक्टर तो क्या अस्पताल निदेशक समेत पूरी टीम मौजूद थी।

लचर सिस्टम ही जिम्मेदार

डॉक्टर क्या सिस्टम ही लचर है। परिजन कैसे सिलेंडर की व्यवस्था कर सकते हैं। डॉक्टर और स्टाफ किसलिए हैं? हम चाहते हैं कि आइंदा ऐसा किसी के साथ न हो, जैसा हमारे साथ हुआ। -शरीफ खान, पेशेंट के दामाद जो इस घटनाक्रम के गवाह रहे (साथ में उनके मददगार दोस्त आबिद खत्री)

रेलवे अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. ए.के सेंगर से सीधी बात

सवाल : आपके अस्पताल के आईसीयू में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है?

जवाब : हमारा अस्पताल सिरोक और कैंसर अस्पताल से जुड़ा है। मरीज की हालत देख हमने उन्हें कैंसर अस्पताल भेजने की बात कही तो उन्होंने इंकार कर दिया..सिरोक अस्पताल में बैड खाली नहीं थे। हम मानते हैं सुधार की गुंजाइश है..।

-आपके आईसीयू के बाहर बीस मिनट देखा तो पता लगा कि उसके दरवाजे खुले ही रहते हैं और परिजन और आपका स्टाफ तक आराम से आ-जा रहा है?

डायरेक्टर: यहां रेलवे के ही मरीज हैं। हमारा स्टाफ उन्हें रोकता है तो वे झगड़ने लगते हैं।

आईसीयू में गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। यह उनकी जिंदगी से जुड़ा मामला है?

डायरेक्टर: मैंने हाल ही ज्वॉइन किया है..सुधार की जरूरत है, जिसे ठीक करेंगे।

डॉक्टर विजय सोलंकी से सीधी बात: ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा थी

आईसीयू के मरीज का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया और मरीज की मौत ही हो गई?

मरीज महीनेभर से भर्ती थे। रात को ऑक्सीजन कंजप्शन बढ़ गया। सूचना पर तुरंत आया और सिलेंडर की व्यवस्था की।

क्या रात में आईसीयू डॉक्टर की डच्यूटी नहीं रहती और क्या आपात स्थिति के लिए सिलेंडर भी नहीं होते?

ऑक्सीजन सिलेंडर तो पांच-छह हैं, लेकिन मरीज की ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा थी। सो सभी खत्म हो गए। मरीज कैंसर से पीड़ित थे। परिजनों को मरीज गंभीर हालत के बारे में बता रखा था। उनकी मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं थी।

(जवाब के बीच में डायरेक्टर ने बचाव में कहा, डॉक्टर की ऑन कॉल व्यवस्था है..)