Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Sep 30, 2013 - 04:00:08 AM


Title - Used slippers serves Indian railway to save money but not life - खतरे की पटरी पर लाखों की जान -Patri
Posted by : nikhilndls on Sep 30, 2013 - 04:00:08 AM

कटनी। आप ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं, और आपकी चप्पलें टूट गई हैं तो निराश होने की बात नहीं है। क्योंकि आपके लिए बेकार हो चुकी चप्पलें रेलवे के काम आ सकती हैं। बस आप इन्हें कटनी जंक्शन रेलवे स्टेशन तक पहुंचा दीजिए। आप आश्चर्य में पड़ गए ना, लेकिन यह बात सौ फीसदी सच है। कटनी जंक्शन से गुजरने वाली ट्रेनें जुगाड़ की पटरी पर दौड रही हैं। यहां पटरियों की चाबियों को कसने के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा स्टेशन में पड़ी फटी पुरानी चप्पलों से काम चलाया जा रहा है। इससे ट्रेनों के गुजरते समय दुर्घटना की आशंका निरंतर बनी रहती है। कटनी जंक्शन की डाउन ट्रेक मैन लाइन की पटरी की चाबियां फटी चप्पलों को लगाकर कसी जा रही हैं। रेलवे के इस अनोखे जुगाड़ वाले कारनामे पर प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों की नजर पड़ती है, लेकिन आज तक जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं गया। जबलपुर एंड से सतना एंड के बीच की पटरी में करीब एक दर्जन चाबियां ऎसी हैं जिन्हें लाइनर के बजाए चप्पलों के सहारे कसा गया है।

टै्रक से उतर सकती हैं गाडियां

जिन ट्रेनों का कटनी जंक्शन का स्टॉपेज नहीं है वे डाउन ट्रेक से सीधे आगे निकल जाती हैं। कटनी डाउन टै्रक से प्रतिदिन दर्जनों माल गाड़ी व सवारी गाडियां तेज रफ्तार से गुजरती हैं। ऎसे में यदि किसी दिन चप्पलों के टूटने पर चाबियां ढ़ीली पड़ जाएं तो पटरियां हिलने लगेंगी, इससे इंजन व डिब्बे पटरियों से उतर सकते हैं।

क्या है चाबी

रेल की पांतों को स्लीपरों से कसने के लिए उपयोग की जाने वाली लोहे की जलेबी नुमा रॉड होती है। जिसे पटरी के दोनों ओर लगाकर कसा जाता है। ताकि पटरियां निश्चित दूरी पर स्थिरता के साथ बनी रहें। पुरानी या घिस जाने के बाद चाबियों को स्थिर करने के लिए मैटल और फाइबर के लाइनर लगाए जाते हैं। जबकि कटनी के इंजीनियरिंग सेक्शन द्वारा लाइनर के जगह टूटी चप्पलों का उपयोग किया जा रहा है।

कटनी जंक्शन पर हजारों यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां चाबियों को कसने के लिए पुरानी चप्पलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है।

इनका कहना है

पटरियों की देखरेख व मैंटेनेंस हमारे पास है। पुरानी चाबियों में लाइनर लगाए जाते हैं, ताकि वे एक मजबूती से अपनी जगह टिकी रहें। हां चप्पलें तो लगाई गई हैं, जो कि नियमानुसार ठीक नहीं है। चाबी का काम देखने वाला पूरे दिन दौड़ भाग करता रहता है, इसलिए शायद उसने चप्पलें लगाकर उन्हें कस दिया हो। -एके प्रसाद, खंड अभियंता, पीवे, रेलवे विभाग

-लाली कोष्टा