Indian Railways News => Topic started by irmafia on Jan 24, 2013 - 00:00:05 AM


Title - Railway Looking for new way of income - आमदनी के नए रास्ते ढूंढ रहा रेलवे
Posted by : irmafia on Jan 24, 2013 - 00:00:05 AM

नई दिल्ली [संजय सिंह]। रेलमंत्री पवन बंसल ने डीजल की थोक कीमतों में 10.80 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि को रेलवे के लिए झटका बताया है। बंसल के मुताबिक,इससे रेलवे पर सालाना 3300 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 22 जनवरी से किरायों में की गई वृद्धि से सालाना 6600 करोड़ प्राप्त होंगे जिसमें से आधा डीजल पर खर्च हो जाएगा। ऐसे में राजस्व वृद्धि के और इंतजाम करने पड़ेंगे।

रेलमंत्री ने यह तो नहीं बताया कि राजस्व वृद्धि के इंतजाम कैसे होंगे। हां, इस बाबत सुझाव जरूर मांगे। संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में किराये-भाड़े में और प्रत्यक्ष या परोक्ष बढ़ोतरी हो तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अब यह काम रेल बजट में होगा या उसके बाद, यह देखने की बात होगी। ट्रेनों में खराब खाने की शिकायतों के बारे में उन्होंने कहा,कैटरिंग संबंधी शिकायतों के लिए एक टोल फ्री नंबर-1800111321 शुरू किया है। शिकायतों की रेलवे बोर्ड के स्तर पर सुनवाई होगी और तुरंत कार्रवाई के साथ यात्रियों को सूचित किया जाएगा। चार दिन पहले शुरू किए गए इस नंबर पर अब तक 26 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उम्मीद है जैसे -जैसे इसके बारे में लोगों को पता चलेगा शिकायतें बढ़ेंगी।

बंसल के मुताबिक, ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता सुधारने के गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। 2010 की कैटरिंग पालिसी के तहत चार माह के भीतर नए ठेकेदारों को कैटरिंग के ठेके दिए जाएंगे। इनसे देश के प्रमुख स्टेशनों में आधुनिक बेस किचन स्थापित करने को कहा जाएगा। इसके लिए जगह रेलवे उपलब्ध कराएगा। पूरे देश में लगभग ढाई सौ बेस किचन की जरूरत है। दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में एक से ज्यादा बेस किचन स्थापित होंगे। कोशिश होगी कि स्थापित ब्रांडों के फूड आइटम ही परोसे जाएं। इसके मानक तय होंगे। खाने की अधिक कीमत वसूलने वाले चेतावनी-पेनाल्टी से नहीं माने तो उनके लाइसेंस रद किए जाएंगे। नई व्यवस्था में स्टेशनों से हटा दी गई छोटी कैटरिंग यूनिटों को बहाली का मौका दिया जाएगा। रेल नीर के बारे में कहा,जरूरत रोजाना 30 लाख बोतल रेल नीर की है,फिलहाल क्षमता छह लाख बोतलों की है। छह लाख की अतिरिक्त क्षमता स्थापित करने का काम चल रहा है। इसके बावजूद कमी रहेगी। इसलिए पेयजल के दूसरे ब्रांड भी जरूरी हैं। मगर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिर्फ स्थापित ब्रांड ही उचित कीमत पर उपलब्ध कराए जाएं। रेलमंत्री ने कहा हमारा इरादा कैटरिंग से मुनाफा कमाने का नहीं है,लेकिन नुकसान भी नहीं होना चाहिए। फिलहाल कैटरिंग व्यवसाय 1919 करोड़ का है। 2009-10 में इसमें 75 करोड़ व 2010-11 में 54 करोड़ का घाटा हुआ था।