| रेलवे निजीकरण की प्रक्रिया बंद करे सरकार by greatindian on 19 January, 2013 - 03:00 PM | ||
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greatindian | रेलवे निजीकरण की प्रक्रिया बंद करे सरकार on 19 January, 2013 - 03:00 PM | |
दुर्गापुर : ईस्टर्न रेलवे इम्प्लाइज यूनियन (ईआरईयू) का पहला द्विवार्षिक सम्मेलन का समापन रविवार को अंडाल के चित्तरंजन इंस्टीच्यूट में हुआ। जिसमें पूर्व रेलवे के विभिन्न मंडल व वर्कशॉप के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के महासचिव रवि सेन ने कहा कि वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के नेतृत्व में देश में उदारवादी आर्थिक नीति लागू की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप आरंभ के दस साल में पूंजीवाद को अपने संकट संभालने में कुछ मदद जरूर मिली, लेकिन वर्ष 2008 के बाद इस नीति से व्यापक संकट उत्पन्न हो गया।आज स्थिति ये है कि पूंजीवाद का प्रधान केन्द्र अमेरिका घोर मंदी के दौर से गुजर रहा है। उसका प्रभाव भारत पर भी पड़ा है। जोरदार महंगाई, भयानक बेरोजगारी व भ्रष्टाचार के साथ मजदूरों के अधिकार हनन का सिलसिला जारी है। उदारवादी आर्थिक नीति का प्रभाव भारतीय रेल पर भी पड़ा है। इस कारण रेलवे में निजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। ऐसी बहुत चीजों का उत्पादन बंद कर दिया गया है, जो रेलवे खुद किया करता था। अब उन चीजों को निजी कंपनियों से खरीदा जा रहा है, रेलवे का काफी काम ठेका श्रमिकों से कराया जा रहा है। इस कारण स्थायी श्रमिकों की संख्या लगातार घट रही है। रेलवे में काफी पद रिक्त है, सरकार को रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए कदम उठाना चाहिए। नई पेंशन नीति को वापस लेना होगा व निजीकरण की प्रक्रिया बंद चालू करानी होगी, अन्यथा संगठन की ओर से जोरदार आंदोलन किया जाएगा। मौके पर मजदूर नेता एनएन बनर्जी, प्रदीप बनर्जी, सुरेन्द्र सिंह, पार्थ बनर्जी, विभाष घोष आदि उपस्थित थे। | ||