Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Nov 22, 2012 - 09:00:52 AM


Title - राजनीतिक बिसात में उलझा ब्राडगेज
Posted by : nikhilndls on Nov 22, 2012 - 09:00:52 AM

जबलपुर । लगता है जबलपुर-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना राजनीतिक बिसात में उलझ कर रह गई है। यह इसी बात से समझा जा सकता है कि नागपुर-छिंदवाड़ा-सिवनी-मंडला के बीच चल रहे अमान परिवर्तन के लिए पर्याप्त फंड है, परंतु जबलपुर-गोंदिया के कार्य के लिए इस साल फंड नहीं बचा है। जबलपुर-गोंदिया के बीच सुस्त गति का सबसे अधिक प्रभाव बिनैकी के समीप बन रहे पावर हाउस को होने वाला है, जो अगले तीन माह में बनकर तैयार हो जाएगा, परंतु इसे चलाने के लिए कोयला ले जाने के लिए रेल लाइन नहीं है। यह बात इसी से समझी जा सकती है कि छिंदवाड़ा व मंडला में कांग्रेस के सांसद हैं, तो जबलपुर व बालाघाट में भाजपा के सांसद। रेलवे के पास उन क्षेत्रों के लिए फंड की कोई कमी नहीं है, जबकि जिन क्षेत्रों में भाजपा सांसद हैं, वहां पर इस साल काफी कम फंड आवंटित किया गया और जो फंड मिला, वह चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती दो माह में ही समाप्त हो गया, अब स्थिति यह है कि यहां पर काम पूरी तरह बंद है।

आदिवासियों के हितैषी होने का दावा:कांग्रेस व भाजपा सरकार आदिवासियों की हितैषी होने का दावा करती आ रही है, परंतु हकीकत इससे ठीक उलट नजर आ रही है। पिछले 13 सालों से चल रही जबलपुर-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही है। यदि यह परियोजना पूर्ण होती तो जबलपुर से गोंदिया के बीच आदिवासियों का जबर्दस्त विकास होता।

प्रदेश में 24 घंटे बिजली का सपना अधूरा: प्रदेश के मुख्यमंत्री का सपना कि प्रदेश में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का सपना, रेलवे की उपेक्षा से अधूरा ही रहने वाला है। इसका उदाहरण जबलपुर-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना में सामने आया है, जहां जबलपुर व सिवनी जिले की सीमा पर स्थित बिनैकी में झाबुआ थर्मल पावर कंपनी 600-600 मेगावाट बिजली का उत्पादन गृह बना रहा है, जो अगले साल फरवरी-मार्च तक तैयार हो जाएगा, परंतु इसमें उत्पादन शुरू होने में कई साल लगेंगे, इसका कारण रेलवे है, उसका ट्रेक तैयार नहीं है, इसलिए कोयले की मालगाड़ियां यहां नहीं सकती, रेलवे की इस सुस्त गति से इस क्षेत्र में और दो पावर प्लांट व सीमेंट कंपनियां आने वाली थीं, उन पर भी रेल लाइन समय पर नहीं बनने का असर पड़ रहा है।

वहां 75 करोड़ तो यहां मात्र 30 करोड़ का बजट

राजनीतिक दांव-पेंच व आदिवासियों के बीच अपना वर्चस्व दिखाने की राजनीतिक दलों की प्रतिस्पर्धा का उदाहरण इसी से ही देखा जा सकता है कि केंद्र की कांग्रेसनीति यूपीए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2012-13 के रेल बजट में नागपुर-छिंदवाड़ा, छिंदवाड़ा-सिवनी-मंडला के बीच रेल परियोजना के लिए 75 करोड़ रुपए आवंटित किये, जबकि जबलपुर-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना को केवल 30 करोड़ दिए, जबकि यह परियोजना एडवांस स्टेज पर पहुंच चुकी है, वहीं छिंदवाड़ा क्षेत्र की परियोजना अभी प्रारंभिक अवस्था में ही है।